Friday, 11 March 2011

तेरे लिए...(DEDICATE 2 SOMEONE)

DEDICATE  2  *****

भीगती हैं पलकें....., 
दुखता है मन गहरा....!
आज भी है इन यादों पर,
तेरी ममता का पहरा....!! 

माँ तुझे सलाम..........!!
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DEDICATE 2 JONY....

कल तक थे अजनबी,
आज अपने है...
जो जानते ना थे एक-दुसरे को,
आज देखते एक-दुसरे के लिए सपने है..!

एक चेहरा.....
गंभीर-सा, संकुचाता हुआ,
खुद में सिमटा और समता हुआ...
गंभीरता में क्यों छुपाता है खुद को...?
क्या है? क्यों नही बताता है सबको....!

भावों में नही बहता है,
ज्यादा कुछ नही कहता है....
उम्र से ज्यादा समझदार है,
सुनता नही किसी की,
क्योंकि वो खुद्दार है...!

रिश्तों से क्यों घबराता है इतना,
मिलेगा प्यार और अपनापन...
इन्हें सींचेगा जितना.....!!

......SISOOOOOO(तुम्हारी बहिन)..!!
 
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साहित्यिक प्रेरणा के पंखों से ....

गठबंधन.......(relation with books)  
धम्म से धमक आई है
फिर से मेरी जिन्दगी में...
बहुत ही नटखट है ये
सोती हूँ तो जगा देती है,
और जागती हूँ तो सुला देती है....

क्या कहूं इसके बारे में,
मेरे जीवन कि आशा है,
इस जिन्दगी कि परिभाषा है...

मेरी तनहाइयों का साया है,
जीवन जीना इसी ने सिखाया है,
मेरे सूने जीवन का अहलाद है,
इसी ने बताया कौन हिरनकश्यप
और कौन प्रहलाद है....

जीवन कि कठिन राहों में
इसका ही तो साथ है,
पार करूंगी हर डगर
क्योंकि इसके हाथ में मेरा हाथ है....

बिन इसके मेरा अस्तित्व नहीं,
आत्मिक सौन्दर्य है क्षीण,
और क्या कहूं कि जैसे,
बिन पानी के मीन....

मुझे अपना जीवनसाथी बना,
इसने मेरा मान बढ़ाया है,
जब-जब इसने पुकारा,
मेरा दिल भागा-भागा आया है...

सात जन्म का नही बल्कि,
जन्म-जन्म का गठबंधन जोड़ा है,
इस कद्र जुड़ गयी हूँ इससे,
हर जन्म पड़ता थोडा है......

.......kavs"हिन्दुस्तानी"..!!
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मैं भाषा हूँ.....

मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

विचारों को देती मैं आकार हूँ,
वाणी को करती मैं साकार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

लिखित और मौखिक दो रूप प्रकार हूँ,
भावों की अभिव्यक्ति का मैं ही आधार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

कौशल, कला, भाव, और एक क्रिया हूँ,
अनुकरण और अभ्यास की प्रक्रिया हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

संकेतों, ध्वनियों, शब्दों की दरकार हूँ,
सुविकसित, समृद्ध, साहित्य का आधार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!!
.....................kavs"हिन्दुस्तानी"..!!
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Thursday, 10 March 2011

प्रकृति की गोद से......

  


 अनमोल उपहार..........

धरती पर ईशवर का वरदान,
प्रकृति है धरती की शान!
प्रकृति है ईशवर की देन,
जिस पर इठलाता स्वयं भगवान्!!

छवि है इसकी कितनी निराली,
सुन्दरता से ये भरपूर!
रूप इसका इतना निराला,
हर नज़र को मोहने वाला!!

नदी-झरनों की चंचल लहरें,
कल-कल, कल-कल करती शोर!                            
पंछी गाते गीत सुरीले,
रवि-किरणों में जब होती भोर!!         

प्रकृति की रक्षा कर,
रखना है हमें उसका मान!
दिया मानवजाति को जिसने,
प्रकृति की गोद का दान!!

पाकर प्रकृति रुपी अनमोल उपहार,
भारत देश बना महान!
आओ मिलकर प्रण करें हम,
बनाए रखेंगे प्रकृति की शान!!
......kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

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करते हो क्या सांझेदारी......?


ईशवर ने किया प्रकृति का रूप-निखार....,
मानव की लालसा ने इसमें पैदा किया विकार....!

हर तरफ आगे बढ़ने की होड़ बढ़ रहा जिस से...,
वायु प्रदुषण, जल प्रदुषण और ध्वनि का शोर....!

वातावरण को दूषित करने में है सबकी भागेदारी....,
क्यों पर्यावरण संतुलन, शुद्धता में नहीं कोई सांझेदारी.....?

पर्यावरण का संतुलन, संरक्षण है पहली आवश्यकता हमारी....,
पेड़ लगाकर प्रदुषण पर नियंत्रण लगा करनी है सबको सांझेदारी..........!!

...........kavs "हिन्दुस्तानी"..!!
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क्योकि तू सुमन है .......

                                                                           

 गुलाबी सा निखार है;
कोमल सी छुअन है,
क्योंकि तू सुमन है ...!

नाजुकता से पूर्ण है;
सौम्यता से सम्पूर्ण है,
क्योंकि तू सुमन है....!








उज्जवल सी छवि है;
खिलाता तुझे रवि है,
क्योंकि तू सुमन है...!

                                                                                                                                                          
आभा का ऐसा तेज है;
मानवीय सौन्दर्य भी निस्तेज है,
क्योंकि तू सुमन है...!

रंगों से भरपूर है;
महक दूर-दूर है,
क्योंकि तू सुमन है...!

छुईमुई जीवन का प्रतीक है;
झंझोड़ देती जिसे पवन है,
क्योंकि तू सुमन है...!!
.............kavs"हिन्दुस्तानी"..!!



राजनीति के गलियारों से....

.सरहद

दो जिस्म एक जान
हुआ करते थे
एक-दूजे के दिलों का
अरमान हुआ करते थे......

दो हाथ, दो पांव
तेरे भी थे,मेरे भी थे
दोनों सीनों में दिल
एक-सा धड़कता था
जो प्यार और अपनेपन
के लिए तड़पता था........

न जाने कब
इन दिलों के बीच
दीवार बड़ी हो गयी
जो सरहद बन कर
दो मुल्कों के बीच
खडी हो गयी.....



........kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

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राजनीति बनाम बिज़नस

राजनीति अर्थात 
राज करने की नीति में
अब ठन गई है
बदलते स्वरुप में
राज को लूट कर
घर भरने की नीति
अब बन गयी है....!

कुर्सी के लिए देखो
कैसी मची लूट है
भाई-भतीजावाद की
पूरी-पूरी छूट है
लालच की भरमार है
राजनीति का बदल
गया पारावार है......!

जनता बस वोट बैंक
पाने का हथियार है
सत्ता हाथ में आते ही
कर दी जाती दरकिनार है
नेता नही बिचौली हैं
जनता और सत्ता के
बीच खेलें आँखमिचोली हैं.....!

देशभक्ति के नाम पर
दिया जाता जो धरना है
दरअसल और कुछ नहीं
जनता की आँख बचा कर
देश का पैसा भी तो
स्विस बैंक में भरना है.....!

तो भैया राजनीति
अब देशभक्ति नही
पैसा कमाने का जरिया है
दिखावे के उसूलों और
ताकत के रसूख पर
बिज़नस करने का
अपना-अपना नजरिया है....!!

...........kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

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सामाजिक परिप्रेक्ष्य में.....

इंसानियत ........


श्रद्धा और मनु
ने
दिया जन्म
इंसानियत
को ...


नीयत
ने साथ
छोड़ दिया
और...


पथ-भ्रष्ट
हो गया
इंसा
........ kavs"Hindustani"..!!


Wednesday, 9 March 2011

शाशवत सत्य से.......



अस्तित्व.......                                                          

दो पाँव
रखने भर
को
कुछ जमीं
और
थोडा सा


 
खुला आसमान
जिसके बीच
बाहें पसारकर
महसूस
कर सकूँ
अपनी
साँसों को
क्योंकि

अक्सर
लोगों को
कहते सुना है
मैंने
कि
मैं
अभी
जिन्दा हूँ....


.......kavs"हिन्दुस्तानी"..!! 
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अंतिम सफ़र....

दूरी
धरती के
आकाश से
मिलन की...


मौत
जीवन चक्र से
जुडी
अंतिम प्रक्रिया...



कफ़न
देह पर
पहना जानेवाला
अंतिम वस्त्र....


संसार
पहली किलकारी से
अंतिम क्रंदन
के बीच का
मायाजाल...


जीवन
सुख-दुःख
निश्चित-अनिश्चितता
सही-गलत
के बीच
झूलती हुई
एक कड़ी...

और आज
ये कड़ी
मायाजाल
को भेदकर
श्वेत आवरण
में सिमटी
अंतिम परिणिति
से
एकाकार
होती हुई

चली
जा रही है
धरती से
आकाश की ओर
अपने अंतिम सफ़र पर...!!

...........kavs"हिन्दुस्तानी"..!!
                                                                                       
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नियति......

मासूमियत से भरा
वो चेहरा
झुनझुने की
एक झुनझुनाहट पर
दस दस किलोलें भरता
माँ की गोद में
कि चलो
कोई तो है
जो
जीवन की
कंटीली राहों
से है बेखबर
मेरे होठों के
बीच की रेखा
जो फैल कर
मुस्कान
बन गयी थी
कुछ सोच कर
फिर अपने
दायरों में
सिमट गई
कि
कभी तो
इसे भी
उन गर्म हवाओं से
दो-चार होना पड़ेगा
जो जीवन की
कंटीली राहों
पर चलते हुए
बार-बार उखाड़ेंगी
उसके पाँव
पर फिर भी
थकने की उसे
इजाज़त नहीं
क्योंकि
चलना
उसका नसीब है
किन्कर्तव्यविमूध
थी मैं
जो
ये भी नहीं
कह सकती थी
कि
तू चलना
मत सीखना
क्योंकि
ये तो
नियति है
जिन्दगी की..!!!!!
......kavs "हिन्दुस्तानी"..!!
                              


ऊपर वाले से...............

शुक्रिया

या खुदा..!
तेरा शुक्रिया..!!

तूने मुझे अच्छा नेचर, 
और एक नेक दिल दिया..!
जो समझता है दूसरों के
दिल की कैफियत को.....!!

जिस से जुड़ता है
उसे अपनाता चलता है....!
क्योंकि वो  समझता है
"वसुधैव  कुटुम्बकम"
की परिभाषा को.....!!

..........KAVS "हिन्दुस्तानी"..!!

दो कदम मंजिल की ओर....

मंजिल.....

मंजिल
में छुपी
किस्मत की खुशियाँ
जैसे
सुदूर में
चमकता हुआ चाँद
करीबी
जितनी उससे
बढती जाती है
होंसला
जज्बो का
उफान पाता है.....


कांटे
राह रोकते
पैदा करते अडचनें
पर शोहरते बुलंदी
पाने की चाहत
तमाम
कंटीली राहो को
पिलाकर लहू
सिंचती
उन्हें चलती
अपनी मंजिल की ओर .............

...............KAVS"hindustani"..!!

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जीवन एक संघर्ष

गहन गुप-चुप अँधेरे को,
रोशनी की दरकार है .........


दीपक में सिमटी हुई बाती को,
लौ का इंतज़ार है.........


सफ़लता पाने के इच्छुक को,
ना उम्मीदी से तकरार है.......


अरे! वो जीवन ही क्या,
जिसमे संघर्ष ना हो...........
ऐसा तो जीवन ही बेकार है..!!!
.............. kavs "हिन्दुस्तानी"..!!
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