Friday, 11 March 2011

साहित्यिक प्रेरणा के पंखों से ....

गठबंधन.......(relation with books)  
धम्म से धमक आई है
फिर से मेरी जिन्दगी में...
बहुत ही नटखट है ये
सोती हूँ तो जगा देती है,
और जागती हूँ तो सुला देती है....

क्या कहूं इसके बारे में,
मेरे जीवन कि आशा है,
इस जिन्दगी कि परिभाषा है...

मेरी तनहाइयों का साया है,
जीवन जीना इसी ने सिखाया है,
मेरे सूने जीवन का अहलाद है,
इसी ने बताया कौन हिरनकश्यप
और कौन प्रहलाद है....

जीवन कि कठिन राहों में
इसका ही तो साथ है,
पार करूंगी हर डगर
क्योंकि इसके हाथ में मेरा हाथ है....

बिन इसके मेरा अस्तित्व नहीं,
आत्मिक सौन्दर्य है क्षीण,
और क्या कहूं कि जैसे,
बिन पानी के मीन....

मुझे अपना जीवनसाथी बना,
इसने मेरा मान बढ़ाया है,
जब-जब इसने पुकारा,
मेरा दिल भागा-भागा आया है...

सात जन्म का नही बल्कि,
जन्म-जन्म का गठबंधन जोड़ा है,
इस कद्र जुड़ गयी हूँ इससे,
हर जन्म पड़ता थोडा है......

.......kavs"हिन्दुस्तानी"..!!
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मैं भाषा हूँ.....

मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

विचारों को देती मैं आकार हूँ,
वाणी को करती मैं साकार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

लिखित और मौखिक दो रूप प्रकार हूँ,
भावों की अभिव्यक्ति का मैं ही आधार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

कौशल, कला, भाव, और एक क्रिया हूँ,
अनुकरण और अभ्यास की प्रक्रिया हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

संकेतों, ध्वनियों, शब्दों की दरकार हूँ,
सुविकसित, समृद्ध, साहित्य का आधार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!!
.....................kavs"हिन्दुस्तानी"..!!
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