Wednesday, 9 March 2011

दो कदम मंजिल की ओर....

मंजिल.....

मंजिल
में छुपी
किस्मत की खुशियाँ
जैसे
सुदूर में
चमकता हुआ चाँद
करीबी
जितनी उससे
बढती जाती है
होंसला
जज्बो का
उफान पाता है.....


कांटे
राह रोकते
पैदा करते अडचनें
पर शोहरते बुलंदी
पाने की चाहत
तमाम
कंटीली राहो को
पिलाकर लहू
सिंचती
उन्हें चलती
अपनी मंजिल की ओर .............

...............KAVS"hindustani"..!!

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जीवन एक संघर्ष

गहन गुप-चुप अँधेरे को,
रोशनी की दरकार है .........


दीपक में सिमटी हुई बाती को,
लौ का इंतज़ार है.........


सफ़लता पाने के इच्छुक को,
ना उम्मीदी से तकरार है.......


अरे! वो जीवन ही क्या,
जिसमे संघर्ष ना हो...........
ऐसा तो जीवन ही बेकार है..!!!
.............. kavs "हिन्दुस्तानी"..!!
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