Sunday, 5 June 2016


      करते हो क्या सांझेदारी...?

ईशवर ने किया प्रकृति का रूप-निखार....,
मानव की लालसा ने इसमें पैदा किया विकार....!

हर तरफ आगे बढ़ने की होड़ बढ़ रहा जिस से...,
वायु प्रदुषण, जल प्रदुषण और ध्वनि का शोर....!

वातावरण को दूषित करने में है सबकी भागेदारी....,
क्यों पर्यावरण संतुलन, शुद्धता में नहीं कोई सांझेदारी.....???

पर्यावरण का संतुलन, संरक्षण है पहली आवश्यकता हमारी....,
पेड़ लगाकर प्रदुषण पर नियंत्रण लगा करनी है सबको सांझेदारी..!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Friday, 25 September 2015


सबक

ज़िंदगी की पाठशाला में,
पढ़ाये गये थे जो सबक़..
सबने पढ़े, गढ़े और..
आगे बढ़ गये..
ऐसा क्या था..?
जो मैं पढ़ नहीं पायी..
सफलता की सीढ़ियाँ 
चढ़ नहीं पायी..
आज मिला है 
उस किताब का 
एक फटा हुआ पन्ना
जिस पर धुंधले-से
अक्षरों में लिखा है-
.... "स्वार्थ"..!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!



Saturday, 13 September 2014



जद्दोजहद

जद्दोजहद..
कल्पना
और
सच्चाई
के बीच
की खाई को
पाटने की ...

एक अन्तर्द्वन्द्व ..
एक कशमकश …

उबल रहा था
मस्तिष्क की
भट्टी में
मन का अबोलापन ....

जो जानता था ..
कि नहीं
रह सकती
एक म्यान में
दो तलवारें
साथ-साथ .......

मिटना
ही होगा
एक रूप को
और एक
पा जायेगा
अपना अस्तित्व ....

अंततः
हारना पड़ा
कल्पना को
सच्चाई के
धरातल पर…

क्योंकि ...
हर व्यंजना
सच नही होती
और सच्चाई
अक्सर थोड़ी
कडवी होती है…

और
कुछ व्यंजनाओ को
सच होने के लिए
लेना पड़ता है
पुनर्जन्म ....

©.... Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Friday, 15 August 2014


नया जन-प्रतिनिधि

बनकर नव जन-प्रतिनिधि
हुआ आगमन मंच पर,
नमन कराकर सबसे
यह शीलवान,
शुरू करता है आत्म-आख्यान .....

शिक्षा-व्यापार में हूँ मैं,
राजनीति के प्रसार में हूँ मैं.
लोक-सभा में भी मैं,
और शोक सभा में भी मैं..!

मेरा अहं ही सब पर हावी,
सब की किस्मत की मैं चाबी,
ख़्वाबों-ख़्यालों में ही सही...

नग्न के झोंपड़े में भी मैं,
इंसानी जूनूं के खोपड़े में भी मैं,
भोग-विलास में भी मैं,
निर्धनता की आस में भी मैं..!

नामौजूदगी में मेरी ,
ना हो कोई सौदा,
ना ही आंतरिक संधि,
ना ही कोई मसौदा क्योंकि...

हर व्यापार मैं भी मैं,
देश के सार में भी मैं,
कामगार में भी मैं,
और सरकार में भी मैं..!

तो समझ लूं..
मिलेंगें सब वोट मुझे ,
दावा है ये मेरे मन का,
पर प्रतिनिधि का नाम जानना,
अधिकार है जन-जन का....!

सोचते होगें
ये प्रतिनिधि है कैसा,
अरे अज्ञानी मतदाता..!
मेरा नाम है "पैसा"...!!💰 😎 💸

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!



Wednesday, 29 January 2014



शुक्रिया

या खुदा..!
तेरा शुक्रिया.. 

तूने मुझे अच्छा नेचर, 
और एक नेक दिल दिया..
जो समझता है दूसरों के
दिल की कैफियत को...

जिस से जुड़ता है
उसे अपनाता चलता है...
क्योंकि वो  समझता है
"वसुधैव-कुटुम्बकम्" की
परिभाषा को..!!!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!


Friday, 12 April 2013


कहने से पहले
एक दफा तो
सोचा होता ..
जो टूटा वो
तेरा विश्वास
नहीं...
तेरी खुशियों का
तलबगार कोई था....!

जिसकी धुनों
से बंधकर
सरगम बननी
थी जिन्दगी
उस से
कोई पर्दा
ना राज़ कोई था....!

खुशियाँ भर के
नाव मंझदार में
डूबा दी गयी
उसकी
बीच भंवर में
फंसकर
बचा ले उसे
ऐसा ना कारसाज़ कोई था....!

बड़ी बेपरवाह
सी - थी
कोशिश मेरी
जिसका कोई रूप
ना आकार कोई था
क्यूंकि मंझदार में
डोल रही नैया में
अपना ही सवार कोई था....!

रास्ता जो
उसने दिखाया
शिद्दते-फ़र्ज़
मैंने निभाया
कैसी थी
वो हिम्मत
कहाँ से आया
हौंसला?
या फिर चमत्कार कोई था....!

बे-आबरू कर
कूचे से
निकाल दिया उसने
कहकर कि-
तुझे मेरी
ज़िन्दगी में
शिरकत का
ना अधिकार कोई था....!

कैसे भुला दिया तूने
तेरा आईना हूँ मै
जब तू टूटा
तो मैं
बे-आवाज़ नहीं था
खुद से ज्यादा भरोसा
किया तुझ पर
आ जाए कभी याद
तो मुस्कुरा देना
सोच कर
ऐसा एक शख़्स
कभी पास कोई था....!!!!

  ©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!