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Monday, 21 January 2019


वक़्त-वक़्त की बात है, 
आज इसका, कल उसके साथ है..

दिन तो कितना उजला है,
फिर काली क्यों इतनी रात है..

जब खुशियाँ नहीं टिकती ज़िंदगी में,
तो गम रहता क्यों साथ है..

गहराती चुप्पियाँ खामोश हैं,
कोई करता क्यों नहीं बात है..

खड़ा अकेला घेर रहीं तनहाईयाँ..
देता क्यों नहीं कोई साथ है..

बाहर मौसम खुला-खुला..
अंदर क्यों बरसात है..

भूमि जब बंजर पड़ी..
दिखती कैसे हरी घास है..

मृतप्रायः इंसान यहाँ..
लेते कैसे ये साँस हैं..

ऊपर-ऊपर मुस्कराते
दिल में लिए आघात हैं..

रूखी-रूखी मरूभूमि ..
कहीं बहते जल-प्रपात हैं..

बनते-बिगड़ते रोज़ रिश्ते यहाँ..
फिर भी ज़िंदा अहसास हैं..

जाने सफ़र में मिलते कितने..
होता नहीं हर कोई खास है..

जो थाम सके तुझको..
बस वही विश्वास है...

मृगतृष्णा में भटक रहा..
बीत रहा जो पास है..

जिजीविषा ढूँढ रही..
आस में अभिलाष है..

वक़्त- वक़्त की बात है..
आज इसका, कल उसके साथ है..!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Monday, 10 September 2018



तेरी आँख का आँसू हूँ ...
चाहे तो अपना लो चाहे तो गिरा दो…. !

जो आँखों में रहूँगा ..
दिल की हर नमी सहूंगा ...!
जो ढलक गया अंखियों से…
तेरे दर्द की कहानी कहूँगा ...!!

तेरी आँख का आँसू हूँ ...
चाहे तो अपना लो चाहे तो गिरा दो…. !

आशियाँ में रहा तो चमकता रहूँगा ...
कभी ख़ुशी कभी गम में झलकता रहूँगा ...
कराहटो में तेरी फफकता रहूँगा
बेचैनी में सुकून देने को ढलकता रहूँगा ...

तेरी आँख का आँसू हूँ ...
चाहे तो अपना लो चाहे तो गिरा दो…. !

दुनिया की इस चकाचोंध से
पलकों के पीछे सिहरता रहूँगा ..
दिखाने को रंगीन दुनिया की झलक
सतरंगी बन आँखों में बिखरता रहूँगा ....

तेरी आँख का आँसू हूँ ...
चाहे तो अपना लो चाहे तो गिरा दो…. !

©.... Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Monday, 27 August 2018



ना शोर ही मचाए, ना ख़ामोश है ज़िन्दगी,
जागती आँखें लिए मदहोश है ज़िन्दगी..

ना खुल के खिलेे, ना उजाट है ज़िन्दगी,
आती-जाती लहरों का चुप्पा घाट है ज़िन्दगी..

ना चाल ही सूझती, ना मात है ज़िन्दगी,
शतरंज की ऐसी एक बिसात है ज़िन्दगी..

ना रईसी की ज़मात, ना फ़ाका है ज़िन्दगी,
दोनों के बीच झूलता एक ख़ाका है ज़िन्दगी..

ना सुकून का जामा, ना क़फ़न है ज़िन्दगी,
किस दौर से गुजर रही कहाँ दफ़न है ज़िन्दगी..

ना कोई हुक्मरां, ना ही हुक़ूमत है ज़िन्दगी,
जाने कहाँ ज़मींदोज़ कहाँ ज़ब्त है ज़िन्दगी..

ना मुहब्बत ही है, ना हिक़ारत है ज़िन्दगी,
जाने किस सोहबत की शरारत है ज़िन्दगी..!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Monday, 23 July 2018

गम-ए- फ़ौज़ थी
ख़ुशी एक मौज़ थी।
वफादार ज़िन्दगी में..

आवाज़ तराना था
ख़ामोशी अफ़साना था
लगातार ज़िन्दगी में।

कुछ पा लिए
कुछ खो दिए
अहसास ज़िन्दगी के।

कुछ अपना लिए
कुछ छोड़ दिए
विश्वास ज़िन्दगी के।

कुछ समेट लिया
कुछ बाँट दिया
प्यार ज़िन्दगी में।

कुछ सुख थे
कुछ दुःख थे
सदाबहार ज़िन्दगी में।

कुछ संवर गयीं
कुछ बिखर गयीं
याद ज़िन्दगी की।

हर्फ़ हर्फ़ दर्प दर्प
खोखली होती रही
किताब ज़िन्दगी की।

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Saturday, 14 July 2018

ज़िन्दगी तू तो मेरी थी ही नहीं कभी ...
दूसरों में खुद को ढूँढना सिखाया मुझको ....!

तुझसे तो गिला भी क्या करना ...
दूसरों की ख़ुशी और उल्हानों में पाया खुद को…!

ज़िन्दगी है हादसों का शहर  ...
सुकून तो मौत ने दिखाया मुझको...!

सीने से लगा के ले तो गयी कम से कम ..
तूने तो कभी अपनाया ही नहीं मुझको ....!

शुक्राना तेरा इस मेहरबानी के लिए ..
औरों के लिए जीना सिखाया मुझको .... !!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Saturday, 30 June 2018


तकदीर रूठने से पहले चले आना..
ढलती ज़िन्दगी की कहीं शाम हो ना जाए.....!

रूठ कर जो सोचे वो हम से जुदा हो गये....
दिखता तो वो भी नहीं तू भी कहीं खुदा हो ना जाए..!

निकले थे खुद को उजाड़ चमन तेरा सजाने....
सोचा ही नहीं कि रास्ते ये कहीं दीवार हो ना जाए..!

उम्मीद का दीया जलता रहेगा साँसों की रवानगी तलक..
इंतज़ार में उन्निंदी पलकें कहीं थक के सो ना जाए ..!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Saturday, 10 December 2016



आज 
फिर..

तितलियों ने
झंझोड़ डाला
अपने पंखो को...

उसकी खुशियों को
उसके रंगों को

पल-पल
रूप बदलती
ज़िन्दगी की
बिसात पर..!!

     ©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!



Sunday, 2 October 2016



देखे जो रंग ज़माने के
अपनों के बेगानों के
इंद्रधनुष ज़िन्दगी का
सुर्ख़ स्याह हो गया।

खोली जो किताब
करने को हिसाब
धूमिल ज़िन्दगी का
हर फ़लसफ़ा हो गया।

बैठे जो सोचने
खुद ही को कोसने
सफ़र ज़िन्दगी का
क्यों खफ़ा हो गया।

किससे करें शिक़वा
क्या शिकायत करें
मुज़रिम ज़िन्दगी का
दिल हर दफा हो गया।

बेरुखी की रवायत
गमों की इनायत
चेहरा ज़िन्दगी का
किस कदर सफ़ा हो गया।

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Saturday, 31 March 2012

जिन्दगी के पन्नों से.....


जब किस्मत ही रही खफ़ा ताउम्र मुझसे मेरी...
तो जा ज़िन्दगी तुझसे भी कोई गिला नहीं...!!

ज़िन्दगी दूसरों को समझने में गुज़री जिसकी...
उसे समझने वाला कोई मिला ही नहीं...!!

ए रिश्तों तुम्हें तो दिल से निभाया मैंने...
पर मेरी वफ़ा का तो कोई सिला ही नहीं...!!

मुद्दत से बसर थी गमें-ए-किरायेदार की जिसमें...
उस दिल में खुशियों को घर कभी मिला ही नहीं..!!

ग़मों से दोस्ती कर मुस्कराना सिख लिया था...
पर कल जो सूरज ढला वो आज खिला ही नहीं..!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!