Wednesday, 29 January 2014



शुक्रिया

या खुदा..!
तेरा शुक्रिया.. 

तूने मुझे अच्छा नेचर, 
और एक नेक दिल दिया..
जो समझता है दूसरों के
दिल की कैफियत को...

जिस से जुड़ता है
उसे अपनाता चलता है...
क्योंकि वो  समझता है
"वसुधैव-कुटुम्बकम्" की
परिभाषा को..!!!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!


Friday, 12 April 2013


कहने से पहले
एक दफा तो
सोचा होता ..
जो टूटा वो
तेरा विश्वास
नहीं...
तेरी खुशियों का
तलबगार कोई था....!

जिसकी धुनों
से बंधकर
सरगम बननी
थी जिन्दगी
उस से
कोई पर्दा
ना राज़ कोई था....!

खुशियाँ भर के
नाव मंझदार में
डूबा दी गयी
उसकी
बीच भंवर में
फंसकर
बचा ले उसे
ऐसा ना कारसाज़ कोई था....!

बड़ी बेपरवाह
सी - थी
कोशिश मेरी
जिसका कोई रूप
ना आकार कोई था
क्यूंकि मंझदार में
डोल रही नैया में
अपना ही सवार कोई था....!

रास्ता जो
उसने दिखाया
शिद्दते-फ़र्ज़
मैंने निभाया
कैसी थी
वो हिम्मत
कहाँ से आया
हौंसला?
या फिर चमत्कार कोई था....!

बे-आबरू कर
कूचे से
निकाल दिया उसने
कहकर कि-
तुझे मेरी
ज़िन्दगी में
शिरकत का
ना अधिकार कोई था....!

कैसे भुला दिया तूने
तेरा आईना हूँ मै
जब तू टूटा
तो मैं
बे-आवाज़ नहीं था
खुद से ज्यादा भरोसा
किया तुझ पर
आ जाए कभी याद
तो मुस्कुरा देना
सोच कर
ऐसा एक शख़्स
कभी पास कोई था....!!!!

  ©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Saturday, 31 March 2012

जिन्दगी के पन्नों से.....


जब किस्मत ही रही खफ़ा ताउम्र मुझसे मेरी...
तो जा ज़िन्दगी तुझसे भी कोई गिला नहीं...!!

ज़िन्दगी दूसरों को समझने में गुज़री जिसकी...
उसे समझने वाला कोई मिला ही नहीं...!!

ए रिश्तों तुम्हें तो दिल से निभाया मैंने...
पर मेरी वफ़ा का तो कोई सिला ही नहीं...!!

मुद्दत से बसर थी गमें-ए-किरायेदार की जिसमें...
उस दिल में खुशियों को घर कभी मिला ही नहीं..!!

ग़मों से दोस्ती कर मुस्कराना सिख लिया था...
पर कल जो सूरज ढला वो आज खिला ही नहीं..!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

Thursday, 10 March 2011

प्रकृति की गोद से......

   

                   अनमोल उपहार..

धरती पर ईश्वर का वरदान,
प्रकृति है धरती की शान..
प्रकृति है ईश्वर की देन,
जिस पर इठलाता स्वयं भगवान्!

छवि है इसकी कितनी निराली,
सुन्दरता से ये भरपूर..
रूप इसका इतना निराला,
हर नज़र को मोहने वाला!

नदी-झरनों की चंचल लहरें,
कल-कल, कल-कल करती शोर..
पंछी गाते गीत सुरीले,
रवि-किरणों में जब होती भोर!

प्रकृति की रक्षा कर,
रखना है हमें उसका मान..
दिया मानवजाति को जिसने,
प्रकृति की गोद का दान!

पाकर प्रकृति रुपी अनमोल उपहार,
भारत देश बना महान..
आओ मिलकर प्रण करें हम,
बनाए रखेंगे प्रकृति की शान..!!

©....kavs"हिन्दुस्तानी"..!!





राजनीति के गलियारों से....

         सरहद

दो जिस्म एक जान
हुआ करते थे
एक-दूजे के दिलों का
अरमान हुआ करते थे......

दो हाथ, दो पांव
तेरे भी थे,मेरे भी थे
दोनों सीनों में दिल
एक-सा धड़कता था
जो प्यार और अपनेपन
के लिए तड़पता था........

न जाने कब
इन दिलों के बीच
दीवार बड़ी हो गयी
जो सरहद बन कर
दो मुल्कों के बीच
खडी हो गयी.....



©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

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      राजनीति बनाम बिज़नस

राजनीति अर्थात 
राज करने की नीति में
अब ठन गई है
बदलते स्वरुप में
राज को लूट कर
घर भरने की नीति
अब बन गयी है....!

कुर्सी के लिए देखो
कैसी मची लूट है
भाई-भतीजावाद की
पूरी-पूरी छूट है
लालच की भरमार है
राजनीति का बदल
गया पारावार है......!

जनता बस वोट बैंक
पाने का हथियार है
सत्ता हाथ में आते ही
कर दी जाती दरकिनार है
नेता नही बिचौली हैं
जनता और सत्ता के
बीच खेलें आँखमिचोली हैं.....!

देशभक्ति के नाम पर
दिया जाता जो धरना है
दरअसल और कुछ नहीं
जनता की आँख बचा कर
देश का पैसा भी तो
स्विस बैंक में भरना है.....!

तो भैया राजनीति
अब देशभक्ति नही
पैसा कमाने का जरिया है
दिखावे के उसूलों और
ताकत के रसूख पर
बिज़नस करने का
अपना-अपना नजरिया है....!!

©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!



  



सामाजिक परिप्रेक्ष्य में.....



इंसानियत ........

श्रद्धा और मनु
ने
दिया जन्म
इंसानियत
को ...

नीयत
ने साथ
छोड़ दिया
और...

पथ-भ्रष्ट
हो गया
इंसा
©....Kavs"हिन्दुस्तानी"..!!