Sunday, 3 July 2016

खो गया जाने कहाँ, जीवन से हर्ष और उल्लास
थकन भरी है ज़िन्दगी, गम है सबके पास

........
 ये लाइन पढ़ी थी कहीं याद आयी इसी के आगे जोड़ कर बना दिया।
.........


खो गया जाने कहाँ, जीवन से हर्ष और उल्लास
थकन भरी है ज़िन्दगी, गम है सबके पास

बेहताशा भागदौड़, सुख-साधन जुटाने को
तरस गया इंसान खुद से ही मिल पाने को।

छूटा अपनों का साथ, मन में रह गयी मन की बात
बोझिल हो रहा तन-मन, बीतते जाते दिन और रात।

ठहर मुसाफिर सोच जरा, क्या पा रहा क्या खो रहा
खुशियां लेने निकला था, पर खून के आंसू रो रहा।

पड़ा जो पर्दा आँख पर, उतार दे कर दरकिनार
खोल दे बाहो के पाश, जीवन को तू कर स्वीकार।

सुन सुर हवाओं के, जीवन के नए साज़ पर
लिख ले गीत नये, अपने दिल की आवाज़ पर।

जो बिखर गये समेट उन्हें, बुन सपनों का ताना-बाना,
जीवन में हो हर्ष उल्लास, तो हर पल लागे गीत सुहाना।

.....kavs"हिंदुस्तानी"..!!

Saturday, 31 March 2012

जिन्दगी के पन्नों से.....

जब किस्मत ही रही खफा ताउम्र मुझसे मेरी...
तो जा जिन्दगी तुजसे भी कोई गिला नहीं...!!

जिन्दगी दूसरों को समझने में गुज़री जिसकी...
उसे समझने वाला कोई मिला ही नहीं...!!

ए रिश्तों तुम्हें तो दिल से निभाया मैंने...
पर मेरी वफ़ा का तो कोई सिला ही नहीं...!!

मुद्दत से बसर थी गमें-ए-किरायेदार की जिसमें...
उस दिल में खुशियों को घर कभी मिला ही नहीं..!!

ग़मों से दोस्ती कर मुस्कराना सिख लिया था...
पर कल जो सूरज ढला वो आज खिला ही नहीं..!!
.....kavs"हिन्दुस्तानी"..!!





....................................................







तकदीर रूठने से पहले चले आना..
ढलती जिन्दगी की कहीं शाम हो ना जाए.....!!

हम इंतज़ार करेंगे तेरा कयामत तक....
खुदा करे की क़यामत हो और तू आये.....!!
.........
रूठ कर जो सोचे वो हम से जुदा हो गये....
दिखता तो वो भी नहीं तू भी कहीं खुदा हो ना जाए..!!

हम इंतज़ार करेंगे तेरा कयामत तक....
खुदा करे की क़यामत हो और तू आये.....!!
........
निकले थे खुद को उजाड़ चमन तेरा सजाने....
सोचा ही नहीं की रास्ते ये कहीं दीवार हो ना जाए..!!

हम इंतज़ार करेंगे तेरा कयामत तक....
खुदा करे की क़यामत हो और तू आये.....!!
..........
उम्मीद का दीया जलता रहेगा साँसों की रवानगी तलक..
इंतज़ार में उन्निंदी पलकें कहीं थक के सो ना जाए ..!!
.........
हम इंतज़ार करेंगे तेरा कयामत तक....
खुदा करे की क़यामत हो और तू आये.....!!

......kavs"Hindustani"..!!

शिद्दते-फ़र्ज़

कहने से पहले 
एक दफा तो 
सोचा होता ..
जो टूटा वो 
तेरा विशवास 
नहीं...
तेरी खुशियों का
तलबगार कोई था....!

जिसकी धुनों
से बंधकर
सरगम बननी
थी जिन्दगी
उस से
कोई पर्दा
ना राज़ कोई था....!

खुशियाँ भर के
नाव मंझदार में
डूबा दी गयी
उसकी
बीच भंवर में
फंसकर
बचा ले उसे
ऐसा ना कारसाज़ कोई था....!

बड़ी बेपरवाह
सी - थी
कोशिश मेरी
जिसका कोई रूप
ना आकार कोई था
क्यूंकि मंझदार में
डोल रही नैया में
अपना ही सवार कोई था....!

रास्ता जो
उसने दिखाया
शिद्दते-फ़र्ज़
मैंने निभाया
कैसी थी
वो हिम्मत
कहाँ से आया
होंसला?
या फिर चमत्कार कोई था....!

बे-आबरू कर
कुचे से
निकाल दिया उसने
कहकर कि-
तुझे मेरी
जिन्दगी में
शिरकत का
ना अधिकार कोई था....!

कैसे भुला दिया तूने
तेरा आईना हूँ मै
जब तू टूटा
तो मै
बे-आवाज़ नहीं था
खुद से ज्यादा भरोसा
किया तुझ पर
आ जाए कभी याद
तो मुस्करा देना
सोच कर
ऐसा एक शख्स
कभी पास कोई था....!
....kavs"Hindustani"..!! 

Friday, 11 March 2011

तेरे लिए...(DEDICATE 2 SOMEONE)

DEDICATE  2  *****

भीगती हैं पलकें....., 
दुखता है मन गहरा....!
आज भी है इन यादों पर,
तेरी ममता का पहरा....!! 

माँ तुझे सलाम..........!!
...........................................................................

DEDICATE 2 JONY....

कल तक थे अजनबी,
आज अपने है...
जो जानते ना थे एक-दुसरे को,
आज देखते एक-दुसरे के लिए सपने है..!

एक चेहरा.....
गंभीर-सा, संकुचाता हुआ,
खुद में सिमटा और समता हुआ...
गंभीरता में क्यों छुपाता है खुद को...?
क्या है? क्यों नही बताता है सबको....!

भावों में नही बहता है,
ज्यादा कुछ नही कहता है....
उम्र से ज्यादा समझदार है,
सुनता नही किसी की,
क्योंकि वो खुद्दार है...!

रिश्तों से क्यों घबराता है इतना,
मिलेगा प्यार और अपनापन...
इन्हें सींचेगा जितना.....!!

......SISOOOOOO(तुम्हारी बहिन)..!!
 
.................................................................................
 
 
 
 


साहित्यिक प्रेरणा के पंखों से ....

गठबंधन.......(relation with books)  
धम्म से धमक आई है
फिर से मेरी जिन्दगी में...
बहुत ही नटखट है ये
सोती हूँ तो जगा देती है,
और जागती हूँ तो सुला देती है....

क्या कहूं इसके बारे में,
मेरे जीवन कि आशा है,
इस जिन्दगी कि परिभाषा है...

मेरी तनहाइयों का साया है,
जीवन जीना इसी ने सिखाया है,
मेरे सूने जीवन का अहलाद है,
इसी ने बताया कौन हिरनकश्यप
और कौन प्रहलाद है....

जीवन कि कठिन राहों में
इसका ही तो साथ है,
पार करूंगी हर डगर
क्योंकि इसके हाथ में मेरा हाथ है....

बिन इसके मेरा अस्तित्व नहीं,
आत्मिक सौन्दर्य है क्षीण,
और क्या कहूं कि जैसे,
बिन पानी के मीन....

मुझे अपना जीवनसाथी बना,
इसने मेरा मान बढ़ाया है,
जब-जब इसने पुकारा,
मेरा दिल भागा-भागा आया है...

सात जन्म का नही बल्कि,
जन्म-जन्म का गठबंधन जोड़ा है,
इस कद्र जुड़ गयी हूँ इससे,
हर जन्म पड़ता थोडा है......

.......kavs"हिन्दुस्तानी"..!!
......................................................................................................
........................................................................................................................................
मैं भाषा हूँ.....

मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

विचारों को देती मैं आकार हूँ,
वाणी को करती मैं साकार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

लिखित और मौखिक दो रूप प्रकार हूँ,
भावों की अभिव्यक्ति का मैं ही आधार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

कौशल, कला, भाव, और एक क्रिया हूँ,
अनुकरण और अभ्यास की प्रक्रिया हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!

संकेतों, ध्वनियों, शब्दों की दरकार हूँ,
सुविकसित, समृद्ध, साहित्य का आधार हूँ,
मैं भाषा हूँ, मैं भाषा हूँ....,
मानव जीवन की अभिलाषा हूँ...!!
.....................kavs"हिन्दुस्तानी"..!!
.................................................................................

Thursday, 10 March 2011

प्रकृति की गोद से......

  


 अनमोल उपहार..........

धरती पर ईशवर का वरदान,
प्रकृति है धरती की शान!
प्रकृति है ईशवर की देन,
जिस पर इठलाता स्वयं भगवान्!!

छवि है इसकी कितनी निराली,
सुन्दरता से ये भरपूर!
रूप इसका इतना निराला,
हर नज़र को मोहने वाला!!

नदी-झरनों की चंचल लहरें,
कल-कल, कल-कल करती शोर!                            
पंछी गाते गीत सुरीले,
रवि-किरणों में जब होती भोर!!         

प्रकृति की रक्षा कर,
रखना है हमें उसका मान!
दिया मानवजाति को जिसने,
प्रकृति की गोद का दान!!

पाकर प्रकृति रुपी अनमोल उपहार,
भारत देश बना महान!
आओ मिलकर प्रण करें हम,
बनाए रखेंगे प्रकृति की शान!!
......kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

.............................................................................

 

करते हो क्या सांझेदारी......?


ईशवर ने किया प्रकृति का रूप-निखार....,
मानव की लालसा ने इसमें पैदा किया विकार....!

हर तरफ आगे बढ़ने की होड़ बढ़ रहा जिस से...,
वायु प्रदुषण, जल प्रदुषण और ध्वनि का शोर....!

वातावरण को दूषित करने में है सबकी भागेदारी....,
क्यों पर्यावरण संतुलन, शुद्धता में नहीं कोई सांझेदारी.....?

पर्यावरण का संतुलन, संरक्षण है पहली आवश्यकता हमारी....,
पेड़ लगाकर प्रदुषण पर नियंत्रण लगा करनी है सबको सांझेदारी..........!!

...........kavs "हिन्दुस्तानी"..!!
..............................................................................................................

क्योकि तू सुमन है .......

                                                                           

 गुलाबी सा निखार है;
कोमल सी छुअन है,
क्योंकि तू सुमन है ...!

नाजुकता से पूर्ण है;
सौम्यता से सम्पूर्ण है,
क्योंकि तू सुमन है....!








उज्जवल सी छवि है;
खिलाता तुझे रवि है,
क्योंकि तू सुमन है...!

                                                                                                                                                          
आभा का ऐसा तेज है;
मानवीय सौन्दर्य भी निस्तेज है,
क्योंकि तू सुमन है...!

रंगों से भरपूर है;
महक दूर-दूर है,
क्योंकि तू सुमन है...!

छुईमुई जीवन का प्रतीक है;
झंझोड़ देती जिसे पवन है,
क्योंकि तू सुमन है...!!
.............kavs"हिन्दुस्तानी"..!!



राजनीति के गलियारों से....

.सरहद

दो जिस्म एक जान
हुआ करते थे
एक-दूजे के दिलों का
अरमान हुआ करते थे......

दो हाथ, दो पांव
तेरे भी थे,मेरे भी थे
दोनों सीनों में दिल
एक-सा धड़कता था
जो प्यार और अपनेपन
के लिए तड़पता था........

न जाने कब
इन दिलों के बीच
दीवार बड़ी हो गयी
जो सरहद बन कर
दो मुल्कों के बीच
खडी हो गयी.....



........kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

..........................................................................................................................................................................................................


राजनीति बनाम बिज़नस

राजनीति अर्थात 
राज करने की नीति में
अब ठन गई है
बदलते स्वरुप में
राज को लूट कर
घर भरने की नीति
अब बन गयी है....!

कुर्सी के लिए देखो
कैसी मची लूट है
भाई-भतीजावाद की
पूरी-पूरी छूट है
लालच की भरमार है
राजनीति का बदल
गया पारावार है......!

जनता बस वोट बैंक
पाने का हथियार है
सत्ता हाथ में आते ही
कर दी जाती दरकिनार है
नेता नही बिचौली हैं
जनता और सत्ता के
बीच खेलें आँखमिचोली हैं.....!

देशभक्ति के नाम पर
दिया जाता जो धरना है
दरअसल और कुछ नहीं
जनता की आँख बचा कर
देश का पैसा भी तो
स्विस बैंक में भरना है.....!

तो भैया राजनीति
अब देशभक्ति नही
पैसा कमाने का जरिया है
दिखावे के उसूलों और
ताकत के रसूख पर
बिज़नस करने का
अपना-अपना नजरिया है....!!

...........kavs"हिन्दुस्तानी"..!!

..................................................................
                      .....................................................................
                                              ........................................................................